वह पल
खाने की छुट्टी से पहले का आख़िरी पीरियड है। पंखा गरम हवा को बस इधर से उधर कर रहा है। चालीस मिनट से बोर्ड से सवाल उतारते-उतारते कमरा जैसे भारी हो गया है। खिड़की के पास बैठी एक लड़की इतना नीचे खिसक गई है कि उसकी ठोड़ी लगभग कॉपी पर टिकी है। पीछे दो लड़के बेंच के नीचे एक-दूसरे के पैर दबा रहे हैं, बस इसलिए कि कुछ तो हिले। किसी ने लंबी, ज़ोर की जम्हाई ली और उसके पीछे-पीछे तीन जम्हाइयाँ और आ गईं। अब शिक्षक जो भी समझाएँगे, वह किसी के पल्ले नहीं पड़ेगा।
अभ्यास
शुरुआत में बच्चों से कहिए कि अपनी जगह के पास खड़े हो जाएँ। हर बच्चे के पास इतनी जगह हो कि वह किसी को छुए बिना बाँह घुमा सके। पूरा अभ्यास लगभग पाँच मिनट का है। लंबी सुबह में इसे एक या दो बार, पूरी कक्षा के साथ, तब कीजिए जब बच्चे आधे घंटे या उससे ज़्यादा देर से बिना हिले बैठे हों। बस थोड़ी जगह चाहिए और बोर्ड पर चॉक से बना शरीर का एक ख़ाका, जिसे एक बार बनाकर पूरे सत्र के लिए छोड़ दीजिए।
फिर दिन के लिए शरीर का एक हिस्सा चुनिए, और बच्चों को उसे हिलाकर ख़ुद ढूँढने दीजिए। पहले दिन ऊपरी बाँह लीजिए। बच्चे कसकर मुट्ठी बाँधें, कोहनी धीरे-धीरे मोड़ें और दूसरे हाथ से छूकर देखें कि ऊपरी बाँह का अगला हिस्सा कैसे सख़्त हो जाता है। उसका नाम बताइए, बाइसेप्स (biceps), और यह भी कि वह क्या करती है। यह मांसपेशी बाँह के निचले हिस्से को ऊपर खींचती है। अब बाँह सीधी करें और महसूस करें कि इस बार पीछे वाली मांसपेशी काम सँभाल रही है। यह ट्राइसेप्स (triceps) है। बच्चों ने अभी-अभी जान लिया कि मांसपेशियाँ जोड़ी में काम करती हैं।
बाक़ी दिनों में घुटना मोड़ें और सीधा करें और घुटने की कटोरी को सरकते हुए महसूस करें, या अपनी जगह पर दस छोटी छलाँगें लगाकर कलाई की नब्ज़ गिनें।
आख़िर में सबको बैठने को कहिए और बस एक सवाल पूछिए। तुम्हें कहाँ महसूस हुआ? हर बच्चा बोलने से पहले अपने शरीर पर उस जगह उँगली रखे। हर हफ़्ते कुछ बच्चे बोर्ड वाले ख़ाके पर निशान लगाएँ कि कक्षा ने क्या खोजा, और सत्र ख़त्म होते-होते वह ख़ाका हड्डियों, जोड़ों, मांसपेशियों की जोड़ियों और धड़कते दिल से भर जाता है।
हर खिंचाव अपने शरीर पर करके दिखाइए, किसी बच्चे को सुधारने के लिए उसे छुइए मत, और कोई हरकत छोटे रूप में या बैठकर की जाए तो उसे भी पूरा ही मानिए।
किन बातों पर नज़र रखें
जब अभ्यास असर कर रहा हो, तो बच्चे बिना कुनमुनाए उठते हैं, सही जगह झट से बता देते हैं और अंगों के नाम अपने आप बोलने लगते हैं। बैठते समय उनकी पीठ सीधी, पैर शांत और आँखों में चमक होती है।
जब असर न हो रहा हो, तो विराम भगदड़ में बदल जाता है, या झुका हुआ बच्चा झुका ही रहता है। तब सब कुछ धीमा कर दीजिए, धीमी आवाज़ में बोलिए और खिंचाव को दो हरकतों तक सीमित कर दीजिए। अगर कोई बच्चा खड़ा होने से मना करे, तो उसे बैठे-बैठे बाँह वाला हिस्सा करने दीजिए, या अंग का नाम पुकारने का काम सौंप दीजिए। ज़िद मत कीजिए। बड़े बच्चे, ख़ासकर उस उम्र में जब अपने शरीर को लेकर झिझक आने लगती है, हाथ, बाँह, पैर और पीठ तक ही रहना पसंद कर सकते हैं।
अगर कोई बच्चा बार-बार संतुलन खोता है, जोड़ों में दर्द बताता है या दूसरों से बहुत जल्दी थक जाता है, तो माता-पिता से नरमी से बात कीजिए और किसी डॉक्टर या फ़िज़ियोथेरेपिस्ट को दिखाने की सलाह दीजिए।
यह क्यों काम करता है
थोड़ी देर का हिलना-डुलना बच्चों को फिर से काम में लौटने में मदद करता है। मैथ्यू महार (Matthew Mahar) और उनके साथियों ने शिक्षकों से बारह हफ़्ते तक रोज़ दस मिनट का ऐसा गतिविधि-विराम करवाया जो पाठ से जुड़ा था। बच्चों का काम में लगे रहना लगभग 71 से बढ़कर 79 प्रतिशत हो गया, और सबसे ज़्यादा फ़ायदा उन बच्चों को हुआ जिनका ध्यान पहले सबसे कम टिकता था। 2017 में एमांडा वॉटसन (Amanda Watson) और उनके साथियों ने 39 अध्ययनों की समीक्षा की। ज़्यादातर में थोड़े समय के लिए बच्चों का मन काम में ज़्यादा लगा, हालाँकि लेखक ख़ुद चेताते हैं कि इनमें से बहुत-सा शोध मामूली गुणवत्ता का है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2020 के दिशानिर्देश भी कहते हैं कि बच्चे बैठे रहने का समय कम करें।
माइकल रीस (Michael Reiss) और सू डेल टनिक्लिफ़ (Sue Dale Tunnicliffe) ने चार साल के बच्चों से लेकर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों तक, 158 लोगों से कहा कि शरीर के अंदर जो है उसका चित्र बनाएँ। लगभग सबने दिल बनाया और ज़्यादातर ने कुछ हड्डियाँ भी, पर किसी ने भी मांसपेशियों का पूरा तंत्र नहीं बनाया। बच्चे अंगों को अलग-अलग तो पहचानते हैं, पर वे आपस में कैसे जुड़े हैं, यह कम ही जानते हैं। खिंचाव उन्हें मांसपेशियों का ऐसा तंत्र देता है जिसे वे काम करते हुए ख़ुद महसूस कर सकें। वयस्कों पर हुए एक छोटे अध्ययन में मातिल्द शेर्दियू (Mathilde Cherdieu) और उनके साथियों ने पाया कि बाँह के निचले हिस्से की बनावट सीखते समय जिन लोगों ने हाथों के इशारों की नक़ल की, उन्हें कुछ दिन बाद उन लोगों से ज़्यादा याद रहा जिन्होंने सिर्फ़ देखा था।
वह इंद्रिय जो बिना देखे बच्चे को बता देती है कि उसकी बाँह कहाँ है, जिसे वैज्ञानिक अंगों की स्थिति का बोध (proprioception) कहते हैं, वही “बाइसेप्स” शब्द में जान डालती है। इन पाँच मिनटों में बच्चा शरीर के सहारे भी सीखता है और शरीर के बारे में भी। तो फिर हम बच्चों से घंटों एक जगह बैठे रहने की उम्मीद क्यों करते हैं, उस शरीर के साथ जिसे जानना उन्हें किसी ने सिखाया ही नहीं?
यह क्यों काम करता है: R8 Proprioception: the forgotten sense of learning; R4 Body schema: the body a child learns with; R11 Gesture as thinking: what the hands know before words; R49 Six hours of sitting: what the chair teaches
बैठने और मुद्रा में अगला: P14 Standing to think: when to let children learn on their feet
संदर्भ (Notes)
- Mahar, M. T., Murphy, S. K., Rowe, D. A., Golden, J., Shields, A. T., & Raedeke, T. D. (2006). Effects of a classroom-based program on physical activity and on-task behavior. Medicine & Science in Sports & Exercise, 38(12), 2086–2094. https://doi.org/10.1249/01.mss.0000235359.16685.a3
- Watson, A., Timperio, A., Brown, H., et al. (2017). Effect of classroom-based physical activity interventions on academic and physical activity outcomes: a systematic review and meta-analysis. International Journal of Behavioral Nutrition and Physical Activity, 14, 114. https://doi.org/10.1186/s12966-017-0569-9
- World Health Organization. (2020). WHO Guidelines on Physical Activity and Sedentary Behaviour. Geneva: WHO. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK566048/
- Reiss, M. J., & Tunnicliffe, S. D. (2001). Students’ understandings of human organs and organ systems. Research in Science Education, 31(3), 383–399. https://doi.org/10.1023/A:1013116228261
- Cherdieu, M., Palombi, O., Gerber, S., Troccaz, J., & Rochet-Capellan, A. (2017). Make gestures to learn: reproducing gestures improves the learning of anatomical knowledge more than just seeing gestures. Frontiers in Psychology, 8, 1689. https://doi.org/10.3389/fpsyg.2017.01689
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